दशहरा(विजयादशमी) पर निबंध | Essay On Dussehra In Hindi

दशहरा(विजयादशमी) पर निबंध | Essay On Dussehra In Hindi

भारत की संस्कृति और त्यौहार पुरे विश्व में प्रसिद्द है। उसमेसे से एक आज हम दशहरा पर निबंध देखने वाले है। ‌‌‍असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई का प्रतिक के लिये “दशहरा” प्रसिद्ध है। यह त्यौहार पुरे जोश, हर्ष और उल्हास से मनाया जाता है।

Essay On Dussehra In Hindi

दशहरा यह विजयादशमी, दसरा जैसे नामो से भी जाना जाता है। दरसल यह फेस्टिवल रावण नाम के राक्षस राजा का वध और हार के ख़ुशी में मनाया जाता है। रावण नाम का एक लंका नामक राज्य का नरेश यानी राजा था। उसने अयोध्या के राजा प्रभु राम के पत्नी सीता का अपहरण कर लिया था। अपने पत्नी को बचाने एवं दृष्ट रावण के चंगुल से छुड़ाने ने के लिये, राम ने सुग्रीव और हनुमानजी की मदत से एक वानर सेना तयार की थी। फिर उन्होंने समुद्र पार जाकर रावण का वध कर दिया। तभीसे इस ख़ुशी को मनाने के लिये हर साल दशहरा का आयोजन किया जाता है।

Dussehra Essay in Hindi Short & Long

दशहरा यानि हिंदू धर्म और संकृति का महत्वपूर्ण त्यौहार। उल्लास और नयी उर्जा देने का पर्व। साथ ही साल के जो सबसे बड़े और मुख्य महूर्त है। दसरा उसमेसे एक पुरे दिन का महूर्त वाला दिन है। दशहरा यह “दसरा, विजयादशमी और आयुध-पूजा” के नाम से भी जाना जाता है। यह धार्मिक और पारंपरिक त्यौहार है।  इसीलिये सभी को इसके बारे में जानना चाहिये।  इसीलिये आजके लेख में दशहरा पर short और long दोनों ही निबंध दिए गए है।

Short Essay On Dussehra In Hindi – दशहरा पर निबंध

हिदू धर्म के बड़े त्योहारों में से एक “दशहरा” का त्यौहार है।  यह हर वर्ष अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है। पौराणिक कथावो के अननुसार रामयुग में भगवान रामजी ने रावण का वध किया था। कथा में ऐसे लिखा है। की, रावण और राम के बिच करीब दस दिनों तक भीषण युद्ध हुआ था। जिसमे प्रभु रामचंद्र जी ने दसवे दिन रावण को पराजित किया था। तभी से इस दिन को विजय का प्रतिक समझकर विजयदशमी मनाते है।

एक कथा यह भी बताती है। की, माँ दुर्गा और महिषासुर नाम के राक्षस में नौ दिनों तक युद्ध चला था।  इस कहानी में भी माँ दुर्गा को दसवे दिन जीत हासिल हुयी थी। इसीकारण हर साल नौ दिनों तक नवरात्रि का आयोजन कीया जाता है।  जिसमे लोग देवी माता के नौ रूपों की बड़े ही श्रद्धा से पूजा करते है।  फिर दशमी को इस जीत को दशहरा के रूप में मनाया जाता है।

दोनों कहानियाँ अलग-अलग है।  परंतु, दोनों का निष्कर्ष यही है। की सत्य पर असत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है।  और इंसान को सच्चाई के राह पर चलाना सिखाता है। लगभग भारत के हर बड़े शहरो में रावण-दहन का आयोजन किया जाता है। जिसमे रावण के पुतले को जलाकर आतिशबाजी की जाती है। लोग एक दुसरे को मिठाई देते है। साथ ही विजयादशमी के शुभकामनाएं देते है।

रावण दहन के साथ-साथ लोग अच्छा व्यवहार करना एवं अपने बुराईया मिटाने का संकल्प करते है। इस शुभ अवसर पर अपने जीवन के अहम कार्य और निर्णय को शुरुवात करते है।

Long Essay On Dussehra In Hindi – दशहरा पर निबंध

दशहरा एक हिंदू धर्म द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है। साथ ही वर्ष के प्रमुख साढ़े तीन महूर्त में से एक है। इस दिन लोग नये कार्य की शुरुवात करते है। जैसे कोई नयी दूकान शुरवात करना, बिज़नेस चालु करना। परंतु, इस दिन लोग नयी गाड़ी खरीदना बहुत ज्यादा पसंद करते है। दशहरा एक हर्ष, उल्लासदायक और ख़ुशी का त्यौहार है।

अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का आयोजन होता है। प्रामुख्यता: यह त्यौहार दिवाली के 20 दिन पहले और और नवरात्रि के दसवे दिन आता है। पौराणिक कथाओ और रामायण के आधार से, राम जी ने समुद्र तट पर देवी चंडी की उपासना को शुरू किया। फिर उन्होंने उनके पत्नी सीता को हरण करने वाले रावण के साथ युद्ध का बिगुल बजा दिया। यह भीषण युद्ध करीब 9 दिनोंतक चला और दसवे दिन प्रभु रामचंद्र ने रावण का वध कर दिया। इस दसवे दिन के विजय को बादमे “विजयादशमी” के नाम से मनाया जाने लगा।

जैसे की ऊपर के अनुच्छेद में बताया की दसहरा क्यों मनाते है? इसके पीछे काफी सारे पौराणिक कथाये मौजूद है। परंतु इसमें सबसे ज्यादा नवरात्रि और विजयादशमी को प्रमुख महत्व दिया गया है। रामयण युग में राम नाम के अयोध्या के राजा थे। परंतु राज्य के भीतर के सिहासी और राजकारणी मामलो के चलते उनको 14 सालो तक वनवास के लिये भेज दिया गया।

वनवास के लिये उनके साथ छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता भी आई हुयी थी। वे तीनो अपना 14 साल के वनवास के सफ़र को पूरा करने के लिये जंगल में रह रहे थे। परंतु एक दिन शूर्पणखा नाम की एक राक्षिका उस वन में आई जहा पर राम, लक्ष्मण और सीता वास कर रही थी। शूर्पणखा रावण की बहन थी। लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काट दी। इस वजह से वह काफी क्रोधित हुयी और रोते-रोते रावण के पास गयी। उसने वन में उसके साथ हुयी घटना के बारे में रावण को सब बता दिया। तद्पश्यात लंकेस्वर(रावण) काफी क्रोधित हो गया।

अपने बहन के हुये अपमान का बदला लेने के लिये, लंकेस्वर ने सीता माता का छल से हरण कर लिया। जिस कारण राम और रावण का युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान रामजी ने चंडी देवी की भी पूजा और उपासना की। लघबग दस दिन चले इस भीषण युद्ध में दसवे दिन प्रभुरामचंद्र ने रावण को मार दिया था।

तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की विजय समझकर मनाने जाने लगा। दशहरा पुरे भारतवर्ष में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। हर मुख्य शहर के किसी बड़े मैदान में रावण के बड़े पुतले को जलाकर ख़ुशी से मनाया जाता है। शहर के बड़े-बड़े ठिकानो पर रामलीला का आयोजन किया जाता है। जिसमे रामजीवन के बारे में दिखाया जाता है। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। क्षत्रिय लोग अपने शास्त्रों की पूजा करते है। रावण के पुतले को जलाकर लोग एक-दुसरे को यह संदेश देते है। की, बुराई पर अच्छाई की जित हुयी। दसरा के दिन काफी आकर्षक आतिशबाजी भी होती है। साथ ही लोग एक दुसरे को मिठाई बांटते हे और खुद खाते है।

सोचने की बात यह है। रावण को मरे हुये इतने साल हुये पर अभी भी हम उसका वध क्यों करते है? इसका मतलब रावन अभी भी जिन्दा है। फर्क इतना है की वो दस सिरों वाला था। लेकिन आजका रावण एक सर वाला है। जो हम सबके शरीर में वास करता है। परंतु दशहरा वो त्यौहार हे जो हमको बुराई को नष्ट करने का संदेश देता है। इसीलिये अपने मन को अच्छा और शरीर के अन्दर के बुराई को खंत्म करने के लिये रावण के पुतले को जलाया जाता है।

दशहरा मनाने का एक और कारण और कथा भारतीय पुरानो में मौजूद है। कहा जाता है, की माँ दुर्गे और महिषासुर नामक राक्षस के बिच भी ऐसा ही भीषण युद्ध हुआ था। वो भी नौ दिवस चल और दसवे दिन माँ दुर्गे ने महिषासुर का वध कर दिया। तभी से वह महिषासुरमर्दिनी के नाम से प्रसिद्ध हुयी। इसीकारण नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। फिर दसवी को विजयादशमी मनाया जाता है।

खेर दशहरा के पीछें किसी भी घटना और कथा का आधार हो। परंतु हमारे लिये यही मायने रखता है।  की सभी बुरे शक्ति का नाश हुआ।  साथ ही अच्छाई की जीत हुयी।  इस जीत की ख़ुशी सभी के लिये अलग-अलग हो सकती है। जैसे हमारा देश एक किसानो का देश है। इस दिन किसान अपनी फसल घर में लाते है, बच्चो को रावण को इस दिन मारा था। इसीलिये ख़ुशी होती है।  बुजुर्गो को इस बात की ख़ुशी हे की बुराई पर अच्छाई की जीत हुयी।

दशहरा के मनाने के महत्व के साथ-साथ हर प्रांत में यह त्यौहार अलग-अलग तरीकेसे मनाया जाता है.

  • महाराष्ट्र में इसे सिलंगण के नाम से सामाजिक त्यौहार  के रूप के मनाया जाता है। साथ ही सायंकाल के समय सभी नए वस्त्र परिधान करते है। फिर गाव में या गाव के सीमा के पास के शमी वृक्ष के पत्ते को तोड़कर लाते है। और आपपास के सभी पडोसी के को इन पत्तो को सुवर्ण(सोना) के रूप में देते है. बड़े लोगो के पाँव छुते हे और मित्रो और दोस्तों को हैप्पी दशहरा कहकर बधाई देते है. यह काफी अच्छा महूर्त हे इसीलिये कुछ लोग सोना और नयी गाड़िया खरीदते है।
  • पंजाब प्रांत में दशहरा को नवरात्रि की उपासना करके मनाते है। मैदानों में बड़े-बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। रावण दहन भी किया हाता है। एक दूसरो को मिठाईया बांटी जाती है।
  • हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा बहुत प्रसिद्द है। इतना लोकप्रिय है की देश-विदेश यह देखने आते है। पहाड़ी लोग अपने कुल देवता का पूजन करते है। सभी लोग देवतावो के मुर्तियो को बड़े ही आकर्षक तरीकेसे पालकी में सजाते हे और जुलुस का आयोजन करते है। इस जुलुश में नर्तकी नृत्य करती है।
  • बंगाल राज्य में इसे देसे देवी के शक्ति के पूजा के रूप में ही मनाया जाता है। नौ दिनों तक बड़े-बड़े पंडालो में देवी माता की मूर्ति स्थापित की जाती है। त्यौहार के दौरान शहर में जगह-जगह पर मिठाईयो की दुकानों की स्टाल लगायी जाती है। दशमी के दिन विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।  स्त्रियाँ माता के मांग में सिंदूर भरते है।  फिर आरती करके देवीकी विदाई की जाती है।
  • तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और कर्णाटक में भी दसरा यानि दशहरा को देवी की पूजा करके मनाया जाता है।  इन राज्यों में यह पर्व नौ दिनोतक मनाया जाता है।  कर्णाटक राज्य के मैसूर का दशहरा भी पुरे भारत में प्रसिद्ध है। मैसूर में इस दिन हाथी को सुशोभित करके पुरे शहर में जुलुस निकला जाता है।  शहर के हर गली में उजाला किया जाता है।

Coclusion – तो हर साल दशहरा का त्यौहार देश के सभी भागो में बड़े ही धूमधाम और जाल्लोस से मनाया जाता है। यह दिन झुट पर सच्चाई की जीत और नेकी के रस्ते पर चलने का सिख देता है। त्यौहार मनाने का कारण और तरीका कैसे भी हो। लेकिन सभी लोग आपस में मिल-जूट के त्यौहार मनाते है। यही बहुत बड़ी बात है।  तो चलिये में उम्मीद करता हूँ। आपको आजका दशहरा पर निबंध(essay on dussehra in Hindi) काफी पसंद आया होगा।

About Rushikesh Sonawane

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम Rushikesh Sonawane है. और मे jankaribook.com का founder हूँ. और मेने इस ब्लॉग को other blogger की help करने लिये बनाया है. वैसे तो मेरा nature काफी फ्रेंडली है. पर में ब्लॉग्गिंग को लेकर में काफी serious हूँ. blogging सिर्फ मेरी hobby नहीं, बल्कि मेरा जुनून है. And I always live for my passion... और जाने..