जवाहरलाल नेहरु पर निबंध | Essay On Jawaharlal Nehru In Hindi

जवाहरलाल नेहरु पर निबंध | Essay On Jawaharlal Nehru In Hindi

आजके इस लेख में Essay on jawaharlal nehru in Hindi दिया गया है. पंडित जवाहरलाल नेहरु एक महान नेता और स्वतंत्र सेनानी थे. पाठशाला एवं कॉलेजों में इस विषयपर essay लिखने को कहा जाता है. इसीलिये इस article में जवाहरलाल नेहरु पर निबंध दिया गया है.

भारत भूमि में कही सारे थोर पुरुषो ने जन्म लिया है. उन सबका योगदान हमारे लिये बहुत मायने रखता है. उनके चरित्र के बारे में students को निबंध लिखने को कहा जाता है. अगर आपके teacher ने भी यह आपको homework दिया है. तो लेख बताये हुये jawaharlal nehru essay in Hindi की मदत लीजिये.

Esaay on Jawaharlal Nehru in Hindi

Esaay on jawaharlal nehru in Hindi

जवाहरलाल नेहरु पर निबंध – 300 words 

जवाहरलाल लाल नेहरु जी का जन्म आनंद भुवन, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ. वे एक काश्मीरी ब्राम्हण के घर में पैदा हुये थे. वे एक धनि और जाने माने माने वकील के पुत्र थे. उनके पिता का नाम मोतीलाल यह था. शुरुवात की पढाई बालक जवाहरलाल ने घर से ही की. परंतु, अपने पुत्र को उच्च दर्जा की शिक्षा मिले. इसीलिये मोतीलाल जी ने घरपर ही अग्रेज़ी अध्यापक नियुक्त किया था. अपने पढ़ाई के साथ ही नेहरु जी ने घुड़सवारी का भी अभ्यास किया था.

अपने 15 वर्ष के आयु में वे उच्च शिक्षा और वकालत की पढाई करने के लिये इंग्लैंड चले गए. बादमे, उन्होंने सन 1912 में बैरिस्ट्री की परीक्षा उत्तीर्ण की और अपने वतन लौट आये.

इंग्लैंड में रखकर उन्होंने स्वतंत्रता क्या होती है? यह महसूस किया था. परंतु उसके तुलना में भारत में गुलामी का युग चल रहा था. भारतवासियों की अवस्था देखने के लिए उन्होंने पुरे भारतवर्ष की यात्रा की. यात्रा में उन्होंने यह पाया. की, यहापर भारतीय किसानो और मजदूरो की काफी दिन हीन अवस्था है. इसके कारण उनके मन में स्वतंत्रता की इच्छा पैदा हुयी.

भारतीय नागरिको को गुलामी से  मुक्त करने के लिए उन्होंने देश में चल रहे कही आंदोलनों में हिस्सा लिया. 1942 में शुरू हुये गांधीजी के “भारत छोड़ो आंदोलन” में भी सक्रीय भाग लिया. परंतु, इस्सी बिच उन्हें तीन सालो का कारवास भी हुआ.

भारतीयों के आंदोलनों और हिंसात्मक व्यवहार के कारण अग्रेज सरकार ने भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय लिया. अंततः पंद्रह अगस्त 1947 को भारत वर्षो के गुलामी से मुक्त हुआ. आझादी मिलने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने. इसके बाद ही सन 1952 को पहला आम चुनाव हुआ. उस चुनाव में भी कांग्रेस की जीत हुयी. इस जीत से फिरसे एक बार नेहरु जी प्रधानमंत्री बने. और अजीवन इस पद पर बने रहे. एक कर्तबगार नेता होने के नाते उन्होंने कही सारे देशहित के कार्य किये.

Jawaharlal Nehru Essay In Hindi – 500 word(पंडीत जवाहरलाल पर निबंध)

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहार लाल नेहरु थे. उनका जन्म 14 नवंबर 1889 को उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम मोतीलाल और माता का नाम स्वरूपा रानी था. पिता मोतीलाल उस ज़माने के प्रसिद्ध वकील थे. उनकी माता यानी श्रीमती स्वरूपा देवी धार्मिक विचारधारा की व्यक्ति थी.

एक लौता पुत्र होने के कारण, घरमे पंडित जवाहरलाल नेहरु माता-पिता के काफी दुलारे थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुयी थी. लेकिन वह शिक्षा उच्च दर्जा की थी. उनके पिता ने बालक नेहरु जी के लिए अग्रेज शिक्षक नियुक्त किया था. ताकि वे अग्रेज़ी सिख सके. बादमे जब जवाहार लाल 15 साल के आयु के थे. तब उनको उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिये इंग्लैंड भेज दिया गया. वहापर उन्होंने पहले हैरो फिर कैब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन किया. फिर वे सन 1912 में बैरिस्ट्री की शिक्षा ख़त्म करके स्वदेश लौटे.

भारत में लौटने के बाद जवाहरलाल नेहरु जी ने शुरुवात में वकालत की. पर उनकी ज्यादा समय तक वकालत में रूचि नहीं लगी. उन्होंने इंग्लैंड में स्वतंत्र लोकजीवन देखा था. उसके तुलना में भारत में गुलामी का जीवन जीना पड़ता था. वही दूसरी तरफ पंजाब प्रांत में हुये जालियांवाला हत्याकांड ने उनके मन को बहुत पीड़ा पहुचाई थी. इसीलिये उन्होंने भारत को स्वतंत्र करने के लिये बहुत सारे आंदोलन में भाग लिया था. उन्होंने महात्मा गांधी जी के चल रहे “असहयोग आंदोलन” में काफी बड़ा सहयोग दिया. इतना ही अपने जीवनकाल में कही बार जेल यात्रा की और बहुत सारी यातनाये सही.

पंडित जवाहरलाल जी के राजनैतिक जीवन की शुरुवात 1929 में हुयी थी. सन 1929 में लौहोर अधिवेशन ने पंडित नेहरु जी ने कांग्रेस के अध्यक्ष बने. उनके नेतृत्व और सूज बुज से उन्होंने कांग्रेस को नयी दिशा दी. उन्होंने 1942 में कांग्रेस का नेतृत्व करते हुये. भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रीय भाग लिया. इस कारण उनको तीन वर्षो का कारवास भी हुआ था.

आखिर में 1946 में अग्रेज सरकार में भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय लिया. अंततः 15 august 1947 के दिन भारत अंग्रेज के कही वर्षो के गुलामी से मुक्त हुआ. आझादी के बाद, पंडीत जवाहरलाल नेहरु पहले प्रधानमंत्री बने. उन्होंने देश को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने के लिए काफी बड़े-बड़े काम किये. देश के हित में कही सारे निर्णय लिए. पंचशील सिधान्तो के आधार पर नेहरु जी ने चीन के साथ मित्रता भी की थी. परंतु कुछ समय बाद चीन ने भारत के ऊपर धोके से आक्रमण किया. आक्रमण को प्रत्युत्तर देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार नहीं थी. जिसकारण भारतीय सेना को हार का सामना करना पड़ा. चीन से मिले धोका और युद्ध में मिली सिखस्त के कारण नेहरु जी काफी दुखी हो गए थे.

एक कर्तबगार प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ नेहरूजी बच्चो से अधिक प्रेम करते थे. उन्होंने बच्चो के उच्च शिक्षा एवं अच्छे नागरिक बनने के लिए काफी मेहनत की. बच्चे उन्हें प्यार से चाचा नेहरु कहते थे. बच्चो के प्रति इतनी जागरूकता और प्रेम देखकर बादमे उनके जन्मदिन को भारत सरकार की ओर से बालदिवस कहकर मनाने जाने लगा.

Essay on Jawaharlal Nehru In Hindi – 1000 words 

भारत भूमि में काफी सारे महापुरुषों ने जन्म लिया. उनमेसे ही एक पंडित जवाहरलाल नेहरु महान व्यक्ति थे. वे बच्चो को प्यार करने वाले और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री कहकर पहचाने जाते है. उन्होंने 1947 से लेकर 1964 तक प्रथम और लम्बी अवधि तक प्रधानमंत्री का पद संभाला.

पंडित जवाहरलाल नेहरु जी का जन्म काश्मीरी पंडित के घराने में हुआ था. 14 नवंबर 1889 को नेहरु जी का जन्म इलाहाबाद इस शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम मोतीलाल था. मोतीलाल जी पेशे से एक जाने-माने और प्रख्यात वकील थे. जवाहार लाल के माता का नाम श्रीमती स्वरुप देवी था.

बालक जवाहारलाल एकलौते होने के कारण घर में काफी लाडले थे. उनकी शुरवाती शिक्षा घर में ही हुयी थी. परंतु, उनके पिता ने जावाहर को अग्रेज़ी पढाने के लिये एक शिक्षक नियुक्त किया था. बादमे उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए बालक जवाहरलाल को इंग्लैंड भेज दिया गया. वहापर उन्होने हैरो स्कूल और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन किया. इग्लैंड में रहते हुये उन्होंने स्वतंत्र लोकजीवन को महसूस किया था. कुछ समय बाद सन 1912 में नेहरु जी बैरिस्ट्री की परीक्षा उत्तीर्ण हुये. परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद ही वे स्वदेश लौट आये.

भारत लौटने के बाद ही वे अपने पीता के साथ वकालत करने लगे. परंतु, उन दिनों देश वाशियों की परिस्थिति अत्यंत ख़राब थी. अग्रेज सरकार द्वारा भारतीयों पर तरह-तरह के अत्याचार किये जा रहे थे. देश वासियों की ऐसी बिकट अवस्था देखकर पंडितजी जी को अस्वस्थ लगने लगा. उसी दौरान सन 1919 में पंजाब प्रांत में जलियांवाला बाग़ हत्याकांड हुआ. इस हत्याकांड में हाजारो निहस्थे भारतीयों की जान चली गयी. उस घटना को देखकर पंडित जवाहर जी काफी दहल उठे. जलियांवाला हत्याकांड से प्रभावित होकर नेहरु जी ने प्रण लिया. की, वे अंग्रेजो की हुकूमत नहीं सहेंगे. और भारत को अग्रेजो के गुलामों से मुक्त करेंगे.

महात्मा गांधी के आंदलनो से प्रभावित होकर नेहरु जी भारत की स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े. सन 1616 के लखनऊ अधिवेशन में नेहरुजी सर्वप्रथम गांधी जी से मुलाकत हुयी थी. तब गांधीजी उनसे 20 साल बड़े थे. जवाहरलाल जी ने सबसे पहले होमरूल आंदोलन, फिर महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में चल रहे असहयोग आन्दोलन में भी हिस्सा लिया. परंतु, तरह-तरह के आंदोलनों में हिस्सा लेने के कारण जवाहरलालजी को कही बार कारावास भी जाना पड़ा. कारवास में उन्होंने अत्यंत यातनाये सही.

1919 में प्रथम विश्वयुद्ध के तुरंत बाद ही नेहरूजी का कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ाव आरंभ हुआ. सन 1929 में लाहौर अधिवेशन में जावाहर लाल को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. उसके बाद भी काफी बार जवाहारलाल जी को अध्यक्ष बनाया गया था. उनके कार्यक्षमता और नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को नयी दिशा मिल गयी. आगे चलके जवाहरलाल नेहरु ने “भारत छोड़ो आंदोलन” में सक्रीय भाग लिया. परंतु, इस दोरान उनको तीन वर्षो तक कारवास भी हुआ.

भारत छोड़ो आंदोलन के वजह से ब्रिटिश सरकार पूरी तरह से हिंल गयी थी. भारत से छुटते हुये पकड़ को देखकर ब्रिटिश सरकार ने 1946 में भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय लिया. अंततः वर्षो के गुलामी सहने के बाद भारतीयों को स्वतंत्रता मिल गयी. इस सुनहरे अवसर के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरु स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने. आझादी के बाद सन 1954 में आम चुनाव हुआ. इस चुनाव में कांग्रेस की ही जीत हुयी. जिसकारण नेहरु जी पुनप्रधानमंत्री बने. इसके बाद वे अजीवन इस पद पर बने रहे.

जावाहरलाल जीने भारत को एक आधुनिक और उन्नत राष्ट्र बनाने के लिये काफी सारे प्रयास किये. उन्होंने चीन के साथ पांच सिद्धांतों के आधार पर मित्रता बना ली. परंतु सन 1962 में चीन ने विस्वाशघात करके भारत पर आक्रमण कर दिया. अचानक हुये हमले के कारण भारतीय सेना युद्ध के लिए तैयार नहीं थी. जिसकारण भारत को काफी बड़ी हार झेलनी पड़ी.

राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति के साथ-साथ जावाहर जी को बच्चो से काफी प्रेम था. उन्होंने अपने जीवन का अधिकतम समय बच्चो के साथ ही गुजारा है. इतना ही नहीं उन्हें गुलाब काफी ज्यादा पसंद था. वे अपने कुर्ते के जेब में हमेशा गुलाब लगाते थे. सभी बच्चे उन्हें प्यार से चाचा जी कहकर पुकारते थे. उनका मानना था. की, बच्चे देश के उज्वल भविष्य होते है. इसीलिये उन्होंने बच्चो को अनुशाषण, स्वच्छता, नेकी और महत्वकांक्षा आदि. नैतिक मूल्यों के बारे में सिखाया. ताकि बड़े होकर अच्छे नागरिक बन सके.

चाचा जी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद, बच्चो को शिक्षा और विकास के लिए बहुत परिश्रम किये. उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान, भारतीय प्राद्योगिकी संस्थान और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान जैसे शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की थी. उनके इस बच्चो के प्रति प्यार और स्नेह देखकर, बादमे भारत सरकार ने उनके जन्मदिन पर बाल दिवस कहाकर मनाने लगे.

चीन के साथ हुये युद्ध और संघर्ष के बाद चाचाजी के स्वास्थ में अचानक गिरावट आने लगी. उन्हें 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ा. इस वजह से उनकी साँसे रुक गयी. अंततः हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री और बच्चो के चाचा नेहरु की मृत्यु हो गयी.

Conslusion – तो आजके लेख में हमने jawahar nehru essay in Hindi देखा. आशा हे की आपको यह लेख काफी पसंद आया होगा. अगर आप इस post को अपने मित्रो के साथ social media पर share करना चाहते है. तो आप इस अभी social media पर share कर सकते है.

 

About Rushikesh Sonawane

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम Rushikesh Sonawane है. और मे jankaribook.com का founder हूँ. और मेने इस ब्लॉग को other blogger की help करने लिये बनाया है. वैसे तो मेरा nature काफी फ्रेंडली है. पर में ब्लॉग्गिंग को लेकर में काफी serious हूँ. blogging सिर्फ मेरी hobby नहीं, बल्कि मेरा जुनून है. And I always live for my passion... और जाने..

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