महात्मा गांधी पर निबंध | Mahatma Gandhi Essay In Hindi

महात्मा गांधी पर निबंध | Mahatma Gandhi Essay In Hindi

Essay on Mahatma Gandhi In Hindi. महात्मा गांधी के बारे में बच्चा-बच्चा जानता है. उन्होंने अपने जीवन का अहम योगदान अपने देश के लिए दिया है. इसीलिये आजके लेख में महात्मा गांधी पर निबंध दिया गया है. ताकि छात्रों को अपने पाठशाला में गांधी जी के जीवन, कार्य पर निबंध एवं भाषण लिखने में information मिले.

महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता और बापु के नाम से जाना जाता है. उन्होंने अपने पुरे जीवन में सत्य और अहिंसा के मार्ग को अपनानाया है. अग्रेजो से गुलामी से मुक्त करने लिए बापु ने अत्यंत यातनाये और कष्ट सहे है. वो एक युगप्रवर्तक थे. उनके बारे में जानने के लिये नीचे निबंध दिये गये है.

Essay on Mahatma Gandhi In Hindi (महात्मा गांधी पर निबंध)

Essay on Mahatma Gandhi in Hindi

Mahatma Gandhi essay in Hindi (300 words) 

इस देश के धरती पर अनेक बार ऐसी महान विभूतियाँ ने जन्म लिया है. जिन्होंने भारतीय नागरिको को सत्याचरण, अहिंसा तथा विश्वबंधुत्व की राह पर चलना सिखाया है. इन थोर और महान पुरुषो में महात्मा गांधी यह नाम प्रमुख है.

गांधी जी का जन्म में 2 अक्टुम्बर 1869 में पोरबंदर में हुआ था. उनका पूरा नाम, मोहनदास करमचंद गांधी ऐसा था. उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतिलाबाई ऐसा था. पिता राजकोट रियासत में दीवान के तोर पर कार्यरत थे. वही माता एक गृहिणी और धार्मिककार्य, पूजापाठ और उपवास करने वाली महिला थी.

माता धार्मिक वृत्ति की होने से मोहनदास बचपन से सेवादान के बारे में सिख गए थे. इतना ही नहीं उनको किताबे पढने का काफी शौक था. उन्होंने बचपन में हरिश्चंद्र राजा की कहानियाँ पढ़ी थी. सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानियाँ से गांधी जी को बहुत कुछ सिखने को मिला. उनके जीवन चरित्र को पढने के बाद मोहनदास  को सदा के लिये अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली.

मोहनदास ने अपनी मैट्रिक की पढाई पूरी करने के बाद वह, इंग्लैंड में वकालत की पढाई पूर्ण करने के लिये गए. वहापर उन्हे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. परंतु इतने मुश्किलों के बावजूद वह बैरिस्टर की उपाधि लेकर भारत लौट आये.

भारत में आने के बाद उन्होंने कुछ सामय तक, मुंबई में वकालत की प्रैक्टिस की. फिर वे कुछ कानूनी मुकदमो के लिये दक्षिण अफ्रीका चले गए.  वहापर उन दिनों गोरे और काले रंग का भेदभाव था. गांधीजी ने सर्वप्रथम इस भेदभाव मिटाकर कर सत्य के पक्ष में जीत दीला दी. और भारत लौट आये.

भारत में भी भी बहुत अत्याचार चल रहे थे. अग्रेज़ी हुकूमत ने भारतीयों की स्वतंत्रता छीन ली थी. महात्मा गांधी जी ने भारत को ब्रिटिश सरकार के जुल्मो को मुक्त करने के लिए काफी कष्ट किये. उन्होंने देश के युवाओं को एकत्र किया. उनको एकता की शक्ति समझाई और स्वतंत्रता के लढाई में उतरने का आवाहन किया.

गांधी जी ने कही सारे आन्दोलने निकाली. अग्रेजो द्वारा लगाये गए गैरकानूनी कर और नियमो पर प्रतिबंध लगाया. महात्मा गांधीजी ने अपना पूरा जीवन देश सेवा में समप्रित किया. इसीलिये नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उनको राष्ट्रपिता यह उपाधि दी.

महात्मा गांधी पर निबंध (500 word) 

महात्मा गांधीजी ने इस देश के स्वतंत्रता संग्राम में अहम् योगदान दिया है. इसीलिये उनको के राष्ट्रपिता नाम से जाना जाता है. इतना ही नहीं उनको प्यार से “बापु” भी कहा जाता है. ये वो व्यक्तिमत्व था जिसने सत्य और अहिंसा के बारे में लोगो को सिखाया. बापु ने न केवल लोगो को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलना सिखाया. बल्कि, वे खुद अजीवान इस रास्ते को अपनाते रहे. अग्रेजो के खिलाफ लढ़ने के लिये गांधी जी ने इसी शस्र का उपयोग किया. महात्मा गांधीजी को राष्ट्रपिता यह उपाधि, सर्वप्रथम नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने दी थी.

मोहनदास का जन्म गुजरात के पोरबंदर शहर में हुआ था. वे 2 अक्टुम्बर 1869 को जन्मे थे. उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था. और माता का नाम पुतिलाबाई बाई ऐसा था. पुतिलाबाई करमचंद गांधी की चौथी पत्नी थी. मोहनदास अपने पिता के चौथी माता के आखरी संतान थे. महात्मा जी के पिता राजकोट रियासत के दीवान थे. उनकी माता एक धार्मिक महिला थी. माता पुतिलाबाई बाई की दिनचर्या घर और मंदिर तक ही थी. वही अगर घर में कोई बीमार पड़े तो वह दिन-रात बीमार व्यक्ति की सेवा करती थी.

महात्मा गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में ही हुयी. वो पढाई में एक औसतम विद्यार्थी थे. परंतु कभी-कभी वह पुरस्कार लाने में भी सफल हो जाते. उन्होंने बचपन में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानियाँ और जीवन परिचय पढ़ा था. जिसका उनके जीवन पर काफी बड़ा प्रभाव पड़ा. और सदा सत्य के मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित किया. सन 1887 में मोहनदास ने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और अपनी कानूनी पढाई पूर्ण करने हेतु इंलैंड चले गए. इंग्लैंड में उन्होंने अपने माता-पिता ने बताये हुये अनमोल वचनों का पालन किया. फिर बैरिस्टर को उपाधि लेकर वे भारत लौट आये.

भारत में लौटने के बाद शुरु-शुरू में गांधी जी ने मुंबई में वकालत की प्रैक्टिस की. परंतु, मुंबई में उनकी कुछ ख़ास बात नहीं ज़मी. इसीलिये वह राजकोट वापस चले गए. राजकोट जाने के कुछ समय बाद ही, उन्हें कुछ कानूनी मुकदमो के कारण दक्षिण अफ्रीका की यात्रा करनी पड़ी.

दक्षिण अफ्रीका में जाने के बाद, उन्हें गोरा और काला ऐसे रंगभेद का सामना करना पड़ा. वहाके कृष्णवर्णीय(काले रंग के लोग) लोगो की काफी दयनीय अवस्था थी. एक बार तो स्वयं महात्मा गांधी जी को एक गोरे ने ट्रेन से फेंक दिया. क्योंकि उन्होंने प्रथम श्रेणी का टिकट निकाला था. और उस समय प्रथम श्रेणी में गोरे लोगो को ही बैठने का अधिकार था. इस अपमान से ही प्रेरित होकर गांधी जी ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की सोच ली. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के काले और गोरे रंग के भेदभाव को मिटाया. वहाके लोगो को न्याय देकर वो भारत लौटे.

भारत लौटने के बाद उन्होंने ट्रेन से देश के कोनो-कोनो का दौरा किया. ताकि भारतीय लोगो की क्या अवस्था हे यह जान सके. इस दौरे से गांधी जी को यह समझ आया. की भारतवासी अत्यंत संघर्ष से जी रहे है. अग्रेज उनपर काफी जुल्म कर रहे है.

उनके इस जुल्मो को मिटाने एवं आझादी के लढाई में महात्मा गांधीजी ने अहिंसा का रास्ता अपनाया. बापु ने ब्रिटिशो के खिलाफ कही सारे आंदोलने निकाले. उनमे खिलाफत आन्दोलन(1919), असहयोग आंदोलन(1920), हरिजन आंदोलन(1932), भारत छोड़ो आन्दोलन(1942), आदि प्रमुख आंदोलन थे. इस आंदोलनों ने भारत को आझादी देने के लिए काफी अहम भूमिका अदा की है.

महात्मा गांधी ने आजीवन देश सेवा की है. परंतु ऐसे महान व्यक्ति को 30 जनवरी 1948 को नथुराम गोडसे नाम के व्यक्ति ने मार दिया. हजारो समर्थको के हाजिरी में राजघाट दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. आज हमारा देश 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाता है.

Essay on Mahatma Gandhi in Hindi (1000 words)

भारत के इतिहास में कही सारे स्वतंत्र सेनानियों ने जन्म लिया. परंतु महात्मा गांधी एक ऐसा नाम है. जिन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुये. अपनी हासिल की. आक्रमक न होकर शांति से भी क्षत्रु को पराजित किया जा सकता है. यह मिसाल पूरी दुनिया को दी.

महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था. उनका जन्म 2 अक्टुम्बर 1869 में गुजरात्त के पोरबंदर शहर में हुआ था. मोहनदास के पिता नाम करमचंद गांधी था. जो की राजकोट रियासत के दीवान थे. मोहनदास की माता पुतिलाबाई एक धार्मिक वृत्ति की माहिला थी.

बालक मोहनदास को बचपन से पढ़ना अच्छा लगता था. बचपन में उन्होंने श्रवणकुमार की मातृ-पितृ भक्ति सम्भंदी नाटक पढ़ा था. इसके साथ-साथ ही सत्यवादी राजा हरिशचन्द्र की कहानी पढ़ी थी. ऐसे अमृतमय ज्ञान को पढ़कर उनके जीवन पर काफी प्रभाव पड़ा. और आजीवन सत्य के मार्ग पर चलने का निश्चय किया. मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मोहनदास के पिता ने उनका दाखिला भावनगर के शामलदास के कॉलेज में लिया. इसी कॉलेज के दिनों में उनका विवाह कर दिया गया. उनके पत्नी का नाम कस्तूरबा था.

कुछ समय बाद बैरिस्टर बनने के लिये मोहनदास को इंग्लैंड भेज दिया गया. इंग्लैंड में मोहनदास ने बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त कर ली. और वे भारत लौट आये. अपने वतन लौटने के बाद उन्होंने मुंबई में कुछ समय वकालत की प्रैक्टिस की. पर वे मुंबई में पूरी तरह से सफल न हो सके. अंत में पोरबंदर के बड़े व्यापारी शेठ अब्दुल्ला के आमंत्रण पर मई 1893 दक्षिण अफ्रीका पहुंचे.

उन दिनों दक्षिण अफ्रीका के लोग भारत की तरह ही गुलामी का जीवन जी रहे थे. अग्रेज सरकार ने दक्षिण अफ्रीका में गोरा और काला ऐसे रंग-भेद की नीति लागु कर रखी थी. इस नीति के कारण महात्मा गांधी को कही बार अपमानित होना पड़ा. कही बार उनके जुते ट्रेन से फेंक दिये गए. एक बार तो टीसी मास्टर से पिछले डिब्बे में बिठाने के कारण से हुये बहस से उनको चलती ट्रेन से फेंक दिया गया. ऐसी घटनाओं से दुखी और नाराज होकर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका सरकार के विरुध्द आंदोलन शुरू कर दिया गया. इस आंदोलन में वहा के आप्रवासी भारतीय तथा उदारचेता यूरोपियन लोगो का भरपूर सहयोग मिला. जिसके बलबूते पर कुष्णवर्णीय लोगो को न्याय दिया. अंत में अपने उद्देश में सफल होने के बाद स्वदेश लौट आये.

भारत आने के बाद वे स्वदेश की हाल जानना चाहते थे. भारत का सच्चा रूप जानने के लिये गांधी जी ने तीसरे दर्जे के रेल में, भारत के कोने-कोने की यात्रा की. यात्रा करने के पश्च्यात उनको सभी कोनो में लोगो की बिकट अवस्था दिखी. भारतीयों की यह दयनीय दशा देखकर उनका ह्रदय करुना से बिचलित हो उठा. स्थ्याई रूप से निवास करने के लिये उन्होंने अहमदाबाद के नजदीक साबरमती नदी के किनारे आश्रम बनाया. और 25 मई 1915 से वे वहा निवास करने लगे.

उन दिनों भारत वासी एक बुरे वक्त से गुजार रहे थे. ब्रितिशोने भारतीयों को गुलामी के बेडियो से जकड़ा था. महात्मा गांधीजी ने भारत को अग्रेजो से मुक्त कारने के लिए भारतीय जनता को प्रोत्साहन दिया. तरुणों को प्रोत्साहन दिया. जिसके कारण आज़ादी के दीवानों की टोलिया स्वतंत्र रणसंग्राम की लड़ाई में कूद पड़े. गांधी जी ने उनके हात में सत्य और अहिंसा जैसे अनोखे शस्र दिये. और गांधी जी के नेतृत्व में कही सारे आंदोलन चले. उन आंदोलनों में कही सारे लोगो और प्रमुख हस्तियों ने प्रमुख सहभाग लिया. उसमे पंडित जवाहरलाल नेहरु का भी नाम आता है.

जवाहारलाल नेहरु पर निबंध 

गांधी जी के आन्दोलन में असहयोग आंदोलन, सत्यग्रह आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन आदि. प्रमुख थे.

असहयोग आंदोलन :-

गांधी द्वारा शुरू किया गया यह आन्दोलन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कामयाब रहा. जिसने भारत के आज़ादी को नयी दिशा दे दी. जब ब्रिटिश हुकूमत द्वारा भारतीयों पर काफी ज्यादा अत्याचार बढ़ गया था. साथ ही भारतीयों पर काफी सारे प्रतिबंध लगा देने वाले कानून लागू कर दिये थे. उस आधार पर बिना वजह के हज़ारो भारतीयों को गिरफ्तार किया जा रहा था. इसी व्यवहार पर रोक लगाने के लिए आंदोलनों को शुरू कर दिया गया. यह आन्दोलन 1 अगस्त 1920 से लेकर 12 फरवरी 1922 तक चला. परंतु, चौरी-चारा काण्ड के बाद गांधीजी को 12 फरवरी 1922  को यह आन्दोलन बंद करना पड़ा था.

सात्याग्रह आंदोलन :-

इसे नमक आंदोलन से भी जाना जाता था. अंग्रेज भारतीयों पर कई तरह के टैक्स लगाते थे. भारतीय द्वारा नमक बनाने पर अंग्रेज सरकार भारी मात्र में टैक्स लगाया था. इसी बात को ख़त्म करने के लिए महात्मा गांधी जी ने यह आंदोलन छेड़ दिया था. अंग्रेजो द्वारा बनाये गये कानून को तोड़ने के लिए गांधीजी ने डंडी यात्रा निकाली. उन्होंने खुद ही नमक बनाया और इसपर लगे टैक्स का भी विरोध किया. इस आन्दोलन में लाखो-करोडो भारतीयों का जबरदस्त सहयोग मिला.

भारत छोड़ो आंदोलन :-

भारत छोड़ो आंदोलन को द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 9 अगस्त 1942 को आरंभ कर दिया गया था. काकोरी काण्ड के बाद ठीक सतराह साल बाद 9 अगस्त 1942 को यह आन्दोलन शुरू कर दिया गया. इसीकी शुरुवात महात्मा गांधी द्वारा अखिल भारतीय कांगेस समिति में मुंबई अधिवेशन में कर दी थी. इसके द्वारा गांधी जी ने अग्रेजोको भारत छोड़ो यह नारा दिया. जिसमे जनता का जबरदस्त समर्थन मिला. बापु ने इस दौरान जनता को “करो या मरो” का नारा दिया.

परंतु इस आन्दोलन में 9 अगस्त 1942 इस तारीख के दिन निकल ने से पहले; कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सभी सदस्यों को गिरफ्तार कर दिया गया. और कांग्रेस को गैर क़ानूनी संस्था घोषित कर दिया गया. इतना ही नहीं ब्रिटिशो द्वारा महात्मा गांधी जी को अहमदनगर के किल्ले में बंद कर दिया गया. सरकारी आंकड़ो के नुसार इस जनांदोलन में 60,229 लोगो को गिरफ्तार किया गया था. जबकि 1630 लोग घायल और 940 लोग मारे गए थे.

लेकिन भारी संख्या में लोग ब्रिटिश शाशन के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सडको को पर उतरने लगे. कही सारे सरकारी इमारतो पर कांगेस के झंडे फैलाने शुरू कर दिये गए. विद्यार्थी और कामगार हड़ताल पर चले गए. बंगाल के किसानो ने करो के बढ़ोतरी के खिलाफ संघर्ष शुरू कर दिया. ऐसे जबरदस्त समर्थन के कारण यह आंदोलन काफी सफलतापूर्वक रहा. जिस्से अंग्रेजो की नीम हिलाने में काफी मदत हुयी.

गांधी जी की मृत्यु :-

30 जनवरी 1948 को गांधी जी की मृत्यु हुयी. जब महात्मा गांधी जी दिल्ली के बिरला हाउस के मैदान में चहलकदमी कर रहे थे. तब नथुराम गोडसे ने तीन गोलिया मारकर बापु जी की ह्त्या कर दी.

जब मनमोहन गांधी अंतिम साँसे ले रहे थे. तब उनके जुबान से हे… राम… ऐसे शब्द निकल आये थे.

Conclusion:- तो finally, हमने महात्मा गांधी पर निबंध देखा है. आशा हे आपको यह लेख काफी पसंद आया होगा. और उम्मीद हे की यह आर्टिकल आपके पढाई में काफी मदत करेगी. कृपया इस इसे social platform पर share करना मत भूलिये. और educational material को पढ़ने के लिये हमारे facebook page पर follow करिये.

About Rushikesh Sonawane

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम Rushikesh Sonawane है. और मे jankaribook.com का founder हूँ. और मेने इस ब्लॉग को other blogger की help करने लिये बनाया है. वैसे तो मेरा nature काफी फ्रेंडली है. पर में ब्लॉग्गिंग को लेकर में काफी serious हूँ. blogging सिर्फ मेरी hobby नहीं, बल्कि मेरा जुनून है. And I always live for my passion... और जाने..

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