Independence Day Speech In Hindi

Independence Day Speech In Hindi

पाठशाला एवं कॉलेज में पढ़ रहे बच्चो के लिये यहापर Independence Day Speech In Hindi दिया गया है. 15 august यानी हमारे देश का “स्वतंत्रता दिवस” इस दिन हमारा वतन ब्रिटिशो के जुल्मो से मुक्त हुआ. पंद्रह अगस्त को हम सुनेहरा दिन समझकर बड़े ही धुमधाम से मनाते है. आजादी के इस मौके पर स्कूलो में बच्चो को भाषण बोलना होता है. इसीलिये यहापर स्वतंत्रता दिवस पर भाषण दिया गया है. जिसे students स्कूल में बोल सकते है.

15 August Independence Day Speech In Hindi

मित्रो India में सिर्फ दो ही राष्ट्रिय त्यौहार मनाये जाते है. एक हे 26 january यानि ruepublican day और दूसरा 15 Aguast यानी independece day. सबसे बड़ी बात यह दोनों ही त्यौहार हम बड़े आदर, सन्मान, जोश और खुशीसे मनाते है. पर इस दिवस के महत्व के बारे में बच्चो को पता चले. इसिलए स्कूल, विद्यालय और कॉलेज में speech का कार्यक्रम रखा जाता है. तो चलिये समय न गवाते हुये Independence day speech in Hindi को शुरवात करते है.

15 August Independence Day Speech In Hindi

यहापर उपस्थित आदरणीय प्रमुख अथिति, ज्ञान की गंगा बहाने वाले पूज्यनीय अध्यापकगन और मेरे प्यारे मित्रो आप सभीको जोश भरा नमस्कार. हम यहापर एकत्रित एवं उपस्तिथ क्यों हुए है? यह किसीको बताने की जरुरत नहीं है. पर फिर भी में बताना चाहूँगा. आज यहापर हम स्वतंत्रता दिन मनाने आये हुए है. इसीलिए सबसे पहले आपको स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये!

मित्रो में आज इस ख़ुशी के अवसर पर कुछ दो शब्द सुनाने जा रहा हु. में उम्मीद करता हूँ आप इसे बड़े ही शांति से सुनेंगे.

तहे दिल से मुबारक करते है,

चलो आज फिर आझादी के लम्हों को याद करते है;

शहीद हुए थे जो वीर जवान भारत देश के लिए,

उनके जज्बे और वीरता को चलो आज प्रणाम करते है.

मित्रो पहले भारत देश को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था. हमारे हिन्दुस्तान में व्यापार करने के सिलसिले में बहुत सारे देशो का भारत में आना हुआ. जैसे पोर्तुगीज, डच, जर्मन और अग्रेज. परंतु, यहाँ की संपत्ति और समृद्धि देखकर अंग्रेजो को लालच आ गया और वो अपने पैरो को धीरे-धीरे हिन्दुस्तान में जमाने लगे. मेरे देशवासी तो सांफ मन के थे वो अतिथि को भगवान का रूप मानते थे. यही सोचकर हमारे पूर्वजो ने उनको पनाह दी थी.

हमने उनको पनाह दी थी, क्योंकि वो हमारे मेहमान थे, (2)

किसको पता था की वो व्यापारी के रूप में हैवान थे.

धीरे-धीरे करके अंग्रेजो ने छल-कपट और राजकारण शुरू कर दिया था. वो एक-एक प्रदेश के राजाओ को मिलकर उनको लालच देने लगे. उनसे कहने लगे “श्रीमान. हमारी आर्मी आपके साथ हे, हम आपको इतना प्रदेश जीतकर देंगे बस आप हमसे हात मिलालो.” इसतरह का लालच देकर अंग्रेजोने आपस में झगडे लगाये और भारत के एकता को नष्ट करने का काम किया. फिर कुछ ही दिनों के बाद निर्बल हुए, हिंदुस्तान पर उन्होंने हुकुम चलाना शुरु कर दिया.

हमारे देशवाशियो को अपने ही मुल्क में गुलाम बना दिया. उनपर तरह-तरह का अत्याचार किये और बड़े ही अमानवीय होकर जुल्म किये. उनके अत्याचार बढ़ते ही जा रहे थे. सभी क्षेत्र में अपना हुकुम चलाने लगे थे. यहातक की किसानो से जबरदस्ती अफु, नील और मसाले की खेती करवाने लगे. हमारे मजदुरो से बेहरहमी और जानवरों की तरह बर्ताव करते थे. हमारे किसानो से चारा वसूली और अदिकतम कर जमा करने लगे. यहापर हिंदुस्तान के किसान उनको कर देकर भूके सोते थे और यह सारि संपत्ति इंग्लैंड ले जाकर उनके देश का विकास करते थे. दुर्भाग्य से कहना पढ़ रहा हे. उन फिरंगीओने हमारे वतन पर करीब १५० सालो तक राज किया.

उनके अत्याचार कुछ युवाओं और नेताओ को मान्य नहीं थे. उन्होंने ठान लिया था की इन फिरंगी के खिलाफ आवाज उठानी होगी. भारत को अग्रेजों के जुल्मो से मुक्त करने के लिए काफी सारे स्वातंत्र्य सैनिको ने अपना बलिदान दिया. उन्होंने यह नहीं सोचा की में तलवार और हात उठाऊंगा तो जान से हात धो बैठूँगा. उनका तो यही लक्ष था, की अपने वतन को अग्रेजों से मुक्त करना. इनमे पडिंत जवाहरलाल नेहरु, स्वातंत्र्यवीर सावरकर, चंद्रशेखर आज़ाद, महत्मा गाँधी, सुभाषचंद्र बोस, भगतसिंग, रानी लक्ष्मीबाई, लाल लाजपत राय, सुखदेव, लोकमान्य टीळक, इत्यादि. महापुरुषों के नाम आते है. जिनको आज स्वतंत्र सेनानी(freedom fighters) के नाम से जानते है.

यह महापुरुष अलग प्रान्त, अलग धर्म से थे. लेकिन सबका लक्ष एक ही था. अग्रेजों के खिलाफ लढ़ने का तरीका भी निराला था. जैसे भगतसिंग और चंद्रशेखर आज़ाद इंग्रजो पर आक्रमक होकर टूट पड़े थे. तो वही दूसरी तरफ, महात्मा गांधी ने बड़े ही शांतिपूर्वक सत्याग्रह और आंदोलन करके इंग्रजो के नाक में दम करके रखा था. इसके साथ ही महात्मा गाँधी जी ने पुरे दुनिया को यह संदेश दिया की, बिना लढे और खुन बहाहे भी अपना हक़ लिया जा सकता है.

सुभाषचंद्र बोस ने युवावो और लोगो को एकत्रित किया और उनसे कहा. “तुम मुझे खुन दो, में तुम्हे आझादी दूंगा!” इसी वाक्य के साथ उन्होंने युवावो का जमा हुआ खुन फिरसे उबलने को मजबूर किया उनके दिलमे क्रांति और स्वतंत्रता की ज्योत जला दी.

मित्रो सन 1857 से ही “स्वतंत्र भारत” का रणसंग्राम फुकाया गया था. मतलब भारत को अग्रेजो से मुक्त करने का अभियान 1857 में शुरू हुआ था. पर यह आज़ादी हमें इतनी आसानी से मिली और नहीं फिरंगिओं ने हम पर तरस खाकर हमें हमारा वतन लौटाया. सन 1857 से लेकर 1947 इस पुरे 90 साल से ज्यादा अथक परिश्रम और कड़े संघर्ष के बाद हम इंग्रजो के गुलामगिरी से मुक्त है.

वो दिन आ ही गया जिस दिन को देखने के लिए हजारो महापुरुषों ने अपने प्राणों की आहूति दी. अपने परिवार को खोया. वो दिन था 15 अगस्त 1947 जरसल वह 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्र थी, उस वक्त पूरी दुनिया आराम से सोयी हुयी थी; तब पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने आजादी के उस सुनेहरे मौके पर दिल्ली में भाषण दिया था. तभीसे हम पंद्रह अगस्त को Independence day मनाते आ रहे हे.

मित्रो आज़ादी मतलब क्या? Independece का अर्थ होता है. किसी पर निर्भर नहीं रहना. अपने मन-उताबिक जीना. जितना चाहे उतना खुली हवा में निसंकोच होकर सांस लेना. सदा अपने देश और देश के विकास के बारे में सोचना और प्रयत्न करना.

जबसे हम स्वतंत्र हुये, हमारा देश दिन-प्रति-दिनी उचाई के नए कदमो को छु रहा है. पुरे विश्व में और हर क्षेत्र में अपना तिरंगा लहरा रहा है. आखिर में इतने साल की गुलामी और जुल्म सहने के बाद भी, आज हमारा भारत एक स्वतंत्र, विकसनशील और नेकी के रस्ते पर चलने वाला देश है.

मेरे प्यारे बाल-मित्रो में जाते-जाते दो पक्तिया सुनाकर अपने भाषण को पूर्णविराम लगता हूँ.

Independence Day Speech In Hindi

Independence Day Speech In Hindi (2)

माननीय मुख्य अतिथि, आदरणीय अध्यापकगन, अभिभावक और मेरे प्यारे सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार! सबसे पहले तो आपको स्वंतंत्रता दिवस की बधाई. आजका दिन में और सभी भारतीयों के लिए एक महान, विशेष और सुनेहरा दिन है. इस महान राष्ट्रिय तोह्यार को हम मनाने यहापर उपस्थित हुए है.

मेरे प्यारे मित्रो आज से ठीक 72 वर्षो पहले, यानि 15 अगस्त 1947 वो सुनेहरा दिन जब एक दुर्भाग्यवश पूर्व युग का अंत हुआ. एक ऐसा देश जो अपने ही जमीन पर परदेशीओ के जुल्म सहता आ रहा था. जिन्होंने एक नहीं दो नहीं पुरे देडसो साल तक हमपर राज किया अपना हुकुम और शासन चलाया. लेकिन बहुत से क्रांतिकरियो ने अपना बलिदान देकर इस युग का अंत किया.

इस कहानी की शुरुवात तबसे शुरू हुयी थी. जब भारत एक सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था. मित्रो इस सोने की चिड़िया को देखने के लिए बहुत सारे युरोपियन देश व्यापर के बहाने इस जमीन अपने पैर रखे. परंतु, उनमे एक ऐसा भी देश था जो मन में कपट की भावना लेकर आया था.

उस देश का नाम इंग्लैंड है. जिसे ब्रटिश के नाम से जाना जाता है. शुरुवाती दिनों में, यानी जब ब्रिटिश भारत आये थे. तब सिर्फ हमारे देश के रीती रिवाज, परंपरा को समझने और व्यापार करने के हेतु में आये थे. लेकिन, जैसे-जैसे दिन बीतते गए भारत में आने की ब्रिटिशो की संख्या बढती जा रही थी. धीरे-धीरे करके वो हिंदुस्तान में हत्यार, आर्मी और ऑफिसर्स का आना हुआ.

उस काल हिंदुस्तान में राजतंत्र था. आगे जाके ब्रिटिश समझ गए थे. की, भारत में भाईचारा बहुत ज्यादा है. सत्ता और प्रदेश पाने की लालसा है. इसी स्वभाव का फायदा उठाकर, अग्रेंजो ने एक राजा को दुसरे राजा से युद्ध करवाया. इसीके पीछे उनकी यही कूटनीति थी. की जब दोनों आपस में लढ़ेगे तो दोनों की सैन्यशक्ति कम हो जायेगी. और ऐसा करके फिरंगियो ने सबसे पहला एकता को नष्ट किया और बादमे निर्बल बना दिया.

कुछ ही समय बाद, अंग्रेज अपना असली रूप दिखाने लगे. धीरे-धीरे करके एक-एक प्रदेश पर फिरंगी झेंडा लहराने गया. देखते ही देखते पुरे हिंदुस्तान पर अग्रेजो ने कब्ज़ा कर लिया. अब वे भारतीय नागरियो पर जुल्म करने लगे. उनके साथ अमानवीय कृत्य करने लगे. हमारे किसानो का कर और देश की संपत्ति को इंग्लैंड लेक जाकर उनके वतन का विकास किया.

उनके कुकर्म और अत्याचार बढ़ते ही जा रहे थे. जिससे सहन करना नामुनकिन हो रहा था. इसीलिए सबसे पहले सन 1857 से स्वतंत्रता के आंदोलनो का बिगुल बज गया. लेकिन कुछ कारणों की वजह से भारत स्वतंत्र नहीं हो पाया.

लेंकिन हमारे देश के महापुरुषों और स्वतंत्र सेनानी ने तो हिंदुस्तान को फिरंगियो से मुक्त करने का विडा ही उठा लिया था. जैसे मानो, वे नियति से ही लढ रहे थे. भगत सिंग, चन्द्रसेखर आज़ाद, सुखदेव, लोकमान्य तिलक, राजगुरु, सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी, इत्यादि. महापुरुषों के अथक परिश्रम और बलिदान के कारण आज में यहाँ भाषण दे रहा हूँ. और हम सब खुली हवा में स्वतंत्रता की सांस ले रहे है.

मित्रो सन 1857 से शुरू हुयी आज़ादी की लढाई आखिर 15 अगस्त 1947 को ख़त्म हुयी. जब सारा विश्व सो रहा था. तब हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने भाषण दिया था. तभीसे हम आजके दिन को “स्वतंत्रता दिवस” कहकर बड़ी खुशीशे मनाते है.

इतना कहकर में मेरे भाषण को पूर्णविराम लगाता हूँ. जय हिंद! जय भारत!


तो मित्रो आज मैंने आपको इस independes day अवसर पर speech शेयर किया है. में उम्मीद करता हु आपको यह स्वतंत्रता दिन पर भाषण काफी अच्छा लगा होगा. में आपसे गुजारिश करूँगा. की इस ख़ुशी के मौके पर आप नीचे जय हिंद ऐसे कमेंट जरुर कीजियेगा.

 

About Rushikesh Sonawane

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम Rushikesh Sonawane है. और मे jankaribook.com का founder हूँ. और मेने इस ब्लॉग को other blogger की help करने लिये बनाया है. वैसे तो मेरा nature काफी फ्रेंडली है. पर में ब्लॉग्गिंग को लेकर में काफी serious हूँ. blogging सिर्फ मेरी hobby नहीं, बल्कि मेरा जुनून है. And I always live for my passion... और जाने..